💟💛 Nitai Gāyātrī Mantra

See and/or feel Nitāi Himself constantly on your shoulders, near you, or your head on Nitāi's lap by mentally or audibly intoning or singing this deepest Nitāi Gāyātrī Mantra anytime anywhere in any consciousness.

Three Nitāi's Mahā Names: gaurabandhu, neelāmbaradhāri, nitāi
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Three Mahā Gāyātrī Beejas: vidmahe, dheemahi, prachodayāt
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Three Mahā Invocations: kleeṁ, cha, tanno
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Nitāi Gāyātrī Mantra, the Topmost Harināmaruchi Mahā Rasāyana of Nitāi Roopa Dhyāna:

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॥ kleeṁ gaurabandhu cha vidmahe, neelāmbaradhāri cha dheemahi, tanno nitāi prachodayāt ॥

🍃🏵🪷🌺🌻🌱🌷🌼🥀💐🌿

(1) kleeṁ = i invoke premadātā nitāi on my shoulders
(4) gaurabandhu = my golden (gaura) mischievous bosom friend (bandhu) playing with me on my shoulders or the brother of gaura
(2) cha = whom
(3) vidmahe = i know as
(7) neelāmbaradhāri = as the wearer of a dhoti and upper garments of the color of fresh new monsoon clouds to constantly remind himself of his younger brother krishnachandra
(5) cha = and whom
(6) dheemahi = i meditate upon
(8) tanno = may that
(9) nitāi = nityakishora nitāi
(10) prachodayāt = mercifully and constantly manifest on my shoulders to bless and guide me and every soul in creation

"I invoke Premadātā Nitāi on my shoulders, whom I know as my golden (gaura) mischievous bosom friend (bandhu) playing with me on my shoulders or the brother of Gaura. And whom I meditate upon as the wearer of a dhoti and upper garments of the color of fresh new monsoon clouds to constantly remind Himself of His younger brother Krishnachandra. May that Nityakishora Nitāi mercifully and constantly manifest on my shoulders to bless and guide me and every soul in creation."

💟💛 निताइ गायत्री मन्त्र

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॥ क्लीं गौरबन्धु च विद्महे, नीलाम्बरधारी च धीमही, तन्नो निताइ प्रचोदयात् ॥

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(१) क्लीं = मैं अपने कंधों पर प्रेमदाता निताइ का आह्वान करता हूं
(३) गौरबन्धु = मेरे सुनहरे (गौर) वर्ण वाले नित्य बन्धु के रूप में जो मेरे कन्धों पर मेरे साथ नटखट रूप में खेल रहे हैं या जो गौर के बड़े भैया-बन्धु हैं
(२) = जिन्हें मैं
(४) विद्महे = इस रूप मैं जानता हूं
(६) नीलाम्बरधारी = नए वर्षा ऋतु वाले बादलों के रंग की धोती और ऊपरी वस्त्र पहनने वाले के रूप में जो वस्त्र उन्हें अपने छोटे भैया कृष्णचन्द्र की हमेशा याद दिलाते हैं
(५) = और जिनका मैं
(७) धीमही = में ध्यान कर रहा हूँ
(8) तन्नो = कृपया वह
(9) निताइ = नित्यकिशोर निताइ
(10) प्रचोदयात् = मुझे और सभी जीवों को आशीर्वाद और मार्गदर्शन देने के लिए निरन्तर मेरे कन्धों पर प्रकट हों

"मैं अपने कन्धों पर प्रेमदाता निताइ का आह्वान कर रहा हूँ, जिन्हें मैं मेरे सुनहरे (गौर) वर्ण वाले नित्य बन्धु के रूप में जानता हूँ जो मेरे कन्धों पर मेरे साथ नटखट रूप में खेल रहे हैं या जो गौर के बड़े भैया-बन्धु हैं। और जिनका मैं नए वर्षा ऋतु वाले बादलों के रंग की धोती और ऊपरी वस्त्र पहनने वाले के रूप में ध्यान कर रहा हूँ, जो वस्त्र उन्हें अपने छोटे भैया कृष्णचन्द्र की हमेशा याद दिलाते हैं। कृपया वह नित्यकिशोर निताइ मुझे और सभी जीवों को आशीर्वाद और मार्गदर्शन देने के लिए निरन्तर मेरे कन्धों पर प्रकट हों।"

तीन महा नाम : गौरबन्धु, नीलाम्बरधारी, निताइ
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तीन महा बीज : विद्महे, धीमही, प्रचोदयात्
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तीन महा सम्बोधन : क्लीं, च, तन्नो
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निताइ गायत्री मन्त्र, निताइ रूप ध्यान महा रसायन, महा हरिनाम रुचि प्रदाता : ॥ क्लीं गौरबन्धु च विद्महे, नीलाम्बरधारी च धीमही, तन्नो निताइ प्रचोदयात् ॥

सतत मानसिक रटन जगाया रे
निताइ गायत्री मन्त्र का ।
कन्धों पर निताइ (बैठने, चलने के समय)
निताइ की गोद में (लेटने के समय)
मन बिठाया रे, निताइ गायत्री मन्त्र से ॥